बने जब से 
अभिमान मेरे देश के 
संभाली बागडोर 
जब से भारत की 
प्रधान सेवक बन 
किए जितने भी काम 
खुले प्रगति के द्वार बहुत से 
विश्वास हो चला आम जन को 
कोई है जो सोचता/करता है 
उनके लिए हृदय से,
तभी तो अब वह 
नहीं आता किसी के 
बहकावे में,
सुनता/समझता है 
अपने मन से,
क्षेत्र कोई भी हो 
नहीं है अछूता अब प्रगति से,
नहीं हुआ पहले कभी ऐसा 
जो अब हो रहा है 
देश के प्रधान सेवक के साथ 
देश का हर छोटा/बड़ा 
महिलाएँ/बाल/युवा/ वृद्ध
स्वयं दायित्व ले 
अपना कर्तव्य-धर्म निबाहने को 
किसी के कहे बिना 
खड़ा हो रहा है,
सबका साथ, सबका विकास 
सबका विश्वास रंग ला रहा है 
मोदी जी के साथ पूरा देश 
विश्व पटल पर भारत को लाने के
भगीरथ प्रयास में 
सुर में सुर मिलाने जा रहा है।

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