Shri. Babu Ram Varma – बाबूराम वर्मा

जन्म : उत्तर प्रदेश का एक गाँव (खुब्बनपुर) – 25 दिसम्बर 1925
मृत्यु : 15 अक्टूबर 2011
शिक्षा : एम0ए0 (इतिहास), प्रभाकर, साहित्यरत्न, फ्रेंच और जर्मन भाषाओं; अनुवाद विज्ञान में विशेष योग्यता
प्राप्त |
आजीविका : वन अनुसंधान संस्थान देहरादून में हिन्दी अनुवादक रहे (1944-1982 तक)
रुचि : लोकवार्ता, साहित्य, संस्कृति, भाषाएं, इतिहास, पुरातत्व, नृवंश, वानिकी, विज्ञान, विशेषतः वनस्पति
विज्ञान में रुचि। वृहत्तर भारत में भारतीय संस्कृति की ओर गहरा आकर्षण |
प्रकाशन : अनुवादक रहते समय वन संस्थान में लगभग 30 छोटी-बड़ी अनूदित पुस्तकें राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय
स्तर पर प्रकाशित, पीरियाडिकल एक्सपर्ट बुक एजेंसी के लिए वनस्पति विज्ञान, वानिकी विषयक आठ
पुस्तकों का अनुवाद (प्रकाशित) | निबन्ध, कहानी, कविता, लघुकथा, समीक्षा, समालोचनाएं, अंग्रेजी,
बंगाली, पंजाबी, जर्मन एवं फ्रेंच भाषाओं से रचनाएं अनूदित एंव प्रकाशित | राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्‍न
अभिनंदन ग्रंथों में लेख प्रकाशित |
मुख्य : * कुमाऊँ के नरभक्षी- जिमकार्बेट- 1991
* दूनघाटी की गाथा- प्रेम हरिहर लाल- 2006
प्रकाशन : * ‘अपना–अपना विश्वास” नामक चार लेखकों के संयुक्त हानी संकलन में तीन कहानियाँ
प्रकाशित-1993
* बनते-मिटते पद-चिहन (लघुकथाएँ)- 1998
* समानान्तर चलते हुए (डॉ0 जीवन प्रकाश जोशी – बाबूराम वर्मा के पत्र-व्यवहार के चुने पत्र) -2001
पत्र-पत्रिकाएँ : पत्रिका, भारतीय रेल, विश्व हिन्दी दर्शन, गगनाञजूचल, विप्लव,
फ्रंटियर मेल, कथाबिंब, मुक्तकंठ, परिषद्‌ पत्रिका, योजना (हिंदी), नंदन, खेती, कादम्बिनी, नवनीत, राष्ट्रधर्म,
गिरिराज, उद्गार, पंचवटी संदेश, हिंदुस्तान (दैनिक), विज्ञान, विचार, बोध, गौरदर्शन, दक्षिण भारत, अरण्य,
बाल भारती, इतिहास, वैनगार्ड, दूनदर्पण, संस्कृति, मैसूर हिंदी प्रचार परिषद्‌ पत्रिका, हरसिंगार, राष्ट्रदेव,
दून क्लासिफाइड, अकेला, नैणसी, दूधाधारी, वचनामृत, सानुबंध, भोजपुरी लोक, क्रांतिस्वर, संग्राम बटोही,
बारामासा, भूमिजा, डांडीकांटी, संकल्य, शब्दवर, नवाभिव्यक्त्ति, भाववीथिका, आदर्श कौमुदी, नालंदा दर्पण,
क्रांतिमन्यु, हरित वसुन्धरा, उत्तराखंड दर्शन, नया आकाश, आनंद प्रवाह, अभिज्ञानम्‌।

पुरस्कार : * भारत के राष्ट्रपति महामहिम डॉ०0 जाकिर हुसैन द्वारा अखिल भारतीय वानिकी साहित्य पुरस्कार-1983
* भारत के राष्ट्रपति महामहिम ज्ञानी जैल सिंह जी द्वारा अखिल भारतीय वानिकी साहित्य पुरस्कार-1988
* साहित्य मण्डल श्रीनाथ द्वारा- हिन्दी भाषा भूषण सम्मान – 2004