सुन चिड़िया रानी!
तेरी-मेरी एक कहानी!

बड़े नाज
विश्वास/प्रेम से
जीवनसाथी संग मिल कर
श्रम/स्वेद बहा कर नीड़ बहाते
छोटे/बड़े सुख/दुख से गुजर कर
हर्ष/उल्लास के सुमनों से सजाते

रहता प्रयास
भूले से भी न हो नादानी!

होता गुंजित
नीड़ वो अपना
जब शिशु एक सुकोमल
अपनी गोदी में नित मुस्काता
रुदन/हास उसका जीवन में
कभी हँसाता कभी रुलाता

बनती रहती
ये सब बातें एक कहानी!

धीरे-धीरे
शिशु अपने
पल्लवित/संवर्धित होकर
उड़ान वास्ते पंख प् जाते
अपने सपनों की सीमा पाने
दूर-दूर तक नभ में उड़ने जाते

रह जाता
रिक्त नीड़ बन याद सुहानी!

रिक्त नीड़
गुंजित होने को
पुनः जीवन सुरभित होने को
देकर आवाज पास बुलाते
जीवन नहीं रुकता कभी भी
तुम्हें दिखा कर सब समझाते

सुन चिड़िया रानी!
देख तुझे पाई नयी रवानी!

चाहतों के
जुनून में खोये
नींदें रूठी
जाने कब सोयें
जीवन भी कैसी है पिपासा
प्रकृति साहचर्य पा हर्षाता

सुन चिड़िया रानी!
चल उड़ें ऋतु आई सुहानी!

सुन चिड़िया रानी!
मिल आज करें कुछ मनमानी!

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