कवि! 
तुम लिखो 
लिखते रहो 
जरूरी नहीं ये 
कि समझ जाएँ 
आज ही 
लोग इसे,
तुम्हारे शब्द 
कई सदियों बाद 
प्रेरणादीप/ प्रकाश स्तम्भ बनेंगें
तुम केवल अपना 
कवि धर्म निभाना।

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